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Thursday, July 26, 2018

*चंद्रावर जाणारे (उतरणारे) चौथे अभियान*


अपोलो १५*



*चंद्रावर जाणारे (उतरणारे) चौथे अभियान*

*प्रक्षेपण दिवस - २६ जुलै १९७‍१*

अपोलो १५ यह अपोलो कार्यक्रम का नौंवा मानव अभियान था और चन्द्रमा पर अवतरण करने वाला चौथा अभियान था। यह अभीयानो मे से पहला अभियान था जिनमे चन्द्रमा पर ज्यादा समय तक ठहरने की योजना थी।
कमांडर डेवीड स्काट और चन्द्रयान चालक जेम्स इरवीन ने चन्द्रमा पर तीन दिन बिताये और कुल १८.५ घंटे यान बाह्य गतिविधीयो मे लगाये। इस अभियान मे उन्होने चन्द्रयान से दूर जाकर चन्द्रमा का अध्यन करने के लिये लूनर रोवर नामक वाहन का प्रयोग किया। इस अभियान मे उन्होने चन्द्रमा की सतह से कुल ७७ किग्रा नमुने एकत्र किये।
इस दौरान नियंत्रण यान चालक अल्फ्रेड वार्डन (जो चन्द्रमा की कक्षा मे थे) वैज्ञानिक उपकरण यान की सहायता से चन्द्रमा की सतह और वातावरण का अध्यन कर रहे थे। वे पैनोरोमीक कैमरागामा किरण स्पेक्ट्रोमीटरलेजर अल्टीमीटरद्रम्व्यमान स्पेक्ट्रोमीटर का प्रयोग कर रहे थे। अभियान के अंत मे चन्द्रमा की परिक्रमा के लिये एक उपग्रह भी छोड़ा गया।

अंतरिक्ष यात्री दल

डेवीड स्काट
(David Scott) -३ अंतरिक्ष यात्राये कमांडर
अल्फ्रेड वोर्डन
(Alfred Worden) – १ अंतरिक्ष यात्रा
नियंत्रण यान चालक
जेम्स इरवीन
(James Irwin) -१ अंतरिक्ष यात्रा चन्द्रयान चालक

समस्या
प्रक्षेपण के तुरंत बाद चरण १ के अलग होने परचरण १ के उपकरणो ने कार्य बंद कर दिया था। यह चरण २ के ज्वलन से हुआ था जिसने चरण १ के उपकरणो को जला दिया था। यह इसके पहले कभी नही हुआ थाजांच पर पता चला कि अपोलो १५ के लिये कुछ बदलाव किये गये थे जिसमे चरण १ और चरण २ काफी नजदिक हो गये थे। बाद के अभियानो मे इस बदलाव को ही बदल दिया गया।

योजना और प्रशिक्षण
अपोलो १५ के यात्रीदल ने अपोलो १२ के वैकल्पिक यात्री दल के रूप मे कार्य किया था। इस अभियान के सभी यात्री नौसेना से थे जबकि वैकल्पिक यात्री वायुसेना से थे। यह अपोलो १२ के ठीक विपरीत था।
मूल रूप से यह अभियान अपोलो १२,१३,१४ की तरह अभियान(छोटा) अभियान था लेकिन इसे बाद मे J (चन्द्रमा पर ज्यादा समय बिताने वाले अभियान)अभियान मे बदल दिया गया। इस अभियान दल के यात्रीयो को भूगर्भ शास्त्र का गहन प्रशिक्षण दिया गया था।

इस यान ने पहली बार चन्द्रमा पर लुनर रोवर नामके चन्द्र वाहन को चन्द्रमा पर लेकर जाने का श्रेय प्राप्त किया था। यह वाहन बोइंग ने बनाया था। इस वाहन को मोड़कर ५ फीट २० इंच की जगह मे रखा जा सकता था। इसका वजन २०९ किग्रा और दो यात्रीयो के साथ ७०० किग्रा का भार ले जाने मे सक्षम था। इसके पहीये स्वतंत्र रूप से २०० वाट की बिजली की मोटर से चलते थे। यह १०-१२ किमी प्रति घंटा की गति से चल सकता था।
चन्द्रमा की यात्रा
अपोलो १५ को २६ जुलाई १९७१ को ९:३४ को प्रक्षेपित कर दिया गया। इसे चन्द्रमा तक जाने के लिये ४ दिन लगने वाले थे। पृथ्वी की कक्षा मे दो घंटे रहने के बाद सैटर्न ५ राकेट के तीसरे चरण के इंजन SIVB को दागा गया और यान चन्द्रमा की ओर चल दिया।
चौथे दिन वे चन्द्रमा की कक्षा मे पहुंच गये और चन्द्रमा पर अवतरण की तैयारी करने लगे।

स्काट और इरवीन के चन्द्रमा पर तीन दिन के अभियान के दौरान वोर्डन के पास निरिक्षण के लिये एक व्यस्त कार्यक्रम था। इस अभियान मे एक उपकरण कक्ष भी थाजिसमे पैनोरोमीक कैमरागामा किरण स्पेक्ट्रोमीटरलेजर अल्टीमीटरद्रम्व्यमान स्पेक्ट्रोमीटर उपकरण थे। अभियान की वापिसी मे वोर्डन को यान से बाहर निकल कर कैमरो से फिल्म कैसेट भी निकाल कर लानी थी।

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